मुज़फ्फरनगर। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण इन दिनों गंगा और अन्य नदियाँ उफान पर हैं। गंगा बैराज पर जलस्तर 220.20 मीटर तक पहुँच गया है, जो खतरे के निशान पर है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है।
पिछले पखवाड़े से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियों में तेज बहाव है। देर रात भीमगोड़ा बैराज से 1,32,943 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो रात में ही गंगा बैराज तक पहुंच जाएगा। इससे आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ने की आशंका है। हालांकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का स्तर घटा है, लेकिन बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत अभी दूर है।
इस बीच, गंगा बैराज के गेट नंबर 20 और 21 के तीन बियरिंग खिसक जाने से तकनीकी खराबी उत्पन्न हो गई है। इसके चलते बैराज पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। अब बिजनौर जाने के लिए लोगों को गढ़मुक्तेश्वर और गजरौला होकर लंबा मार्ग तय करना पड़ रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पुल की मरम्मत में कम से कम एक माह का समय लग सकता है। एनएचएआई और रुड़की के इंजीनियरों की टीम जल्द मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू करेगी। गौरतलब है कि करीब पांच वर्ष पहले भी बाढ़ के दौरान गेट नंबर 14 पर इसी तरह की समस्या आई थी, जिसकी मरम्मत में दो से तीन माह का समय लगा था।
बैराज पुल पर यातायात बंद होने से व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों पर असर पड़ा है, जबकि आम लोगों को वैकल्पिक और लंबी दूरी वाले मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने पैदल और दोपहिया वाहनों को बैराज से गुजरने की अनुमति दी है, ताकि न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए राजस्व, सिंचाई और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट पर हैं और प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे और निचले इलाकों में न जाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।










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