मुजफ्फरनगर। जिले में पुलिस भ्रष्टाचार, फर्जी मुठभेड़ों और निर्दोष लोगों को जेल भेजने के आरोपों से किसानों का गुस्सा उबाल पर है। इन मामलों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। संगठन ने 8 अक्टूबर को एसएसपी कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है।
यह निर्णय भोपा थाना क्षेत्र के लव पैराडाइज बैंक्विट हॉल, मोरना में आयोजित एक बड़ी पंचायत में लिया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में किसान, यूनियन पदाधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे। पंचायत में प्रधानपति सर्वेंद्र राठी को जेल भेजने के मामले को लेकर पुलिस के रवैये की तीखी आलोचना की गई।
पुलिस पर गंभीर आरोप-
पंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू टिकैत के मंडल महासचिव योगेश शर्मा ने कहा कि मुजफ्फरनगर की पुलिस पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि “थानों में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर निर्दोष युवकों के पैरों में गोली मारी जाती है और उन्हें अपराधी बताकर जेल भेज दिया जाता है।
योगेश शर्मा ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हमने अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी शुरू कर दी है। 8 अक्टूबर को जिलेभर के किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ एसएसपी कार्यालय का घेराव करेंगे।
जनसमर्थन का आह्वान-
जिला पंचायत सदस्य संजय रवि ने कहा कि पुलिस ने मोरना के एक सम्मानित व्यक्ति को बिना किसी ठोस सबूत के जेल भेज दिया है, जो अत्यंत गलत है। उन्होंने कहा कि “दलित समाज और किसान वर्ग दोनों इस अन्याय के खिलाफ एकजुट हैं, और 8 अक्टूबर को एसएसपी कार्यालय के घेराव में बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
पंचायत में बोलते हुए अन्य वक्ताओं- राजेश कुमार वार्ड सभासद, विकास कुमार (जिला उपाध्यक्ष), अनुज राठी (ब्लॉक अध्यक्ष), अमीर सिंह (तहसील अध्यक्ष), मोंटी राठी, आस मोहम्मद, अजय कुमार, अशोक कुमार, सतीश, अनूप सिंह, राजकुमार, आमिर और रतन सिंह- ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब “किसान अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करणपाल सिंह ने की, जबकि संचालन विकास कुमार ने किया। पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि 8 अक्टूबर के बाद भी पुलिस ने फर्जी मुकदमों की जांच नहीं की तो किसान यूनियन चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी।
“पुलिस भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं” — नारा गूंजा पंचायत में-
पंचायत स्थल पर किसानों ने “पुलिस भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं” और “फर्जी मुठभेड़ बंद करो” के नारे लगाए। यूनियन नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसान, मजदूर और आम जनता के सम्मान की लड़ाई है, जिसे किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।










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