मुजफ्फरनगर। प्रयागराज में हुई हिंसा के बाद आजाद समाज पार्टी (काशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भीम आर्मी संस्थापक सांसद चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण मुजफ्फरनगर के महाभारतकालीन शुक्रताल पहुंचे। उन्होंने यहां संत समनदास जी महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और अपने अनुयायियों से मुलाकात की। इस दौरान हजारों समर्थकों की भीड़ जमा हो गई, जिसे देखते हुए जिला और पुलिस प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए।
चंद्रशेखर ने मीडिया से बातचीत में शुक्रताल को महज एक स्थान नहीं, बल्कि समय के सतगुरु समनदास जी की पावन भूमि बताया। उन्होंने कहा कि यहां की गद्दी के विवाद को सुलझाने के लिए संतों से चर्चा की गई और 10 अगस्त को “बाबा समनदास ट्रस्ट” बनाए जाने की बात कही।
मीडिया से मुखातिब होते हुए सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि प्रयागराज में हुई हिंसा से उनका या उनकी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने साफ कहा, “भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी हिंसा के पक्षधर नहीं, बल्कि संविधान में आस्था रखने वाले संगठन हैं।” उन्होंने घटना की सीबीआई जांच की मांग की और आरोप लगाया कि “पुलिस और स्थानीय लोगों ने जानबूझकर साजिशन हिंसा कराई ताकि कौशांबी की पीड़िता को न्याय न मिल सके।”
उन्होंने बताया कि रविवार को वह कौशांबी में एक रेप पीड़िता के परिजनों से मिलने जा रहे थे, लेकिन उन्हें प्रयागराज के सर्किट हाउस में नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया, “सरकार और पुलिस क्या छिपाना चाहती हैं? क्यों नहीं मिलने दिया गया पीड़ित परिवार से?”
पत्रकारों द्वारा हिंसा में उनका नाम लिए जाने पर चंद्रशेखर नाराज हो गए। उन्होंने कहा, “बिना सबूत मेरे नाम को न घसीटें, वरना एफआईआर दर्ज कराऊंगा। मैं पहले भी नक्सली, फंडिंग और अन्य झूठे आरोपों का सामना कर चुका हूं। मेरे खाते चेक करवा लें, मैं हर जांच को तैयार हूं।”
चंद्रशेखर ने चेतावनी दी कि “अगर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाया गया तो अगला आंदोलन कौशांबी या प्रयागराज में नहीं, सीधे लखनऊ में होगा। विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।”
उन्होंने कहा, “बहुजन समाज पर हो रहे अन्याय को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम अपने समाज के लिए खून का अंतिम कतरा भी देने को तैयार हैं। संतों और गुरु परंपरा का अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा।”
इस दौरान शुक्रताल में भारी पुलिस बल तैनात रहा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। चंद्रशेखर ने उपस्थित संगत से अपील की कि वे शांतिपूर्वक अपने सतगुरु की शिक्षाओं का पालन करें।











Discussion about this post