मुज़फ्फरनगर। थाना मंसूरपुर क्षेत्र के गांव सोहंजनी तगान में सात वर्ष पहले एक दस वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ छेड़छाड़ व दुष्कर्म की कोशिश का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया गया था। वादी अमित कुमार पुत्र मंशाराम निवासी सोहंजनी तगान ने आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग भतीजी खेत में शौच के लिए गई थी, तभी गांव के ही त्यागी बिरादरी के युवक अंशुल पुत्र पप्पन त्यागी ने उसका मुंह दबाकर गलत हरकत करने का प्रयास किया तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
घटना की जानकारी बच्ची ने अपनी ताई को दी, जिसके बाद वादी द्वारा थाना मंसूरपुर में मुकदमा अपराध संख्या 89/2018 धारा 354, 506 आईपीसी, 7/8 पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट में पंजीकृत कराया गया। पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपी अंशुल त्यागी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, बाद में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से उनकी जमानत स्वीकृत हुई।
ट्रायल के दौरान साक्ष्यों में विरोधाभास-
मामला माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष पॉक्सो कोर्ट नंबर-1, न्यायाधीश श्रीमती मंजू भलोठिया की अदालत में विशेष सत्र परीक्षण संख्या 114/2018 के रूप में विचाराधीन रहा। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, पीड़िता सहित कुल पाँच गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
अभियुक्त पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप कुमार त्यागी, एडवोकेट आबिद तेवड़ा एवं एडवोकेट टीटू सिंह ने प्रभावी बहस की।
अदालत द्वारा प्रस्तुत पत्रावली, गवाहों के बयान एवं 164 सीआरपीसी के बयान का सूक्ष्म अवलोकन किया गया।
न्यायालय ने पाया कि-
प्रथम सूचना रिपोर्ट विलंब से दर्ज कराई गई, विलंब का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, गवाहों एवं पीड़िता के बयान परस्पर विरोधाभासी पाए गए, कोई स्वतंत्र साक्षी भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
इन सभी बिंदुओं के आधार पर माननीय न्यायालय ने अभियुक्त अंशुल त्यागी को अभियोजन के आरोप सिद्ध न होने पर बा-इज्जत बरी कर दिया।
अंशुल त्यागी ने न्यायालय का जताया आभार-
फैसले के बाद अंशुल त्यागी ने इसे “न्याय की जीत” बताया और न्यायालय तथा अपने अधिवक्ता संदीप त्यागी का आभार व्यक्त किया।










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