नई दिल्ली : भारत से करारी शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान ने एक शर्मनाक चाल चली है. शहबाज शरीफ सरकार ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को ‘फील्ड मार्शल’ की उपाधि से नवाजा है. कहा गया है कि चूंकि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ‘रणनीतिक जीत’ हासिल की है, इसलिए वे इस पद के हकदार हैं. एक तरह से भारत के फील्ड मार्शल सैम मॉनेकशॉ से तुलना करने की जुर्रत की गई है. लेकिन पाकिस्तानियों को भी सैम मॉनेक शॉ के कद का अंदाजा होगा, वही मानेकशॉ, जिनके नेतृत्व में भारत ने 1971 में पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया था.
जनरल मुनीर को यह पद 2025 में भारत के खिलाफ कथित ऑपरेशन के चलते दिया गया है. हालांकि, इसके बारे में सरकार की ओर से ज्यादा डिटेल नहीं दी गई है. पाकिस्तान को भी पता है कि जनरल मुनीर भी एक हारा हुआ जनरल है. उसके कार्यकाल में ही इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान के घर में घुसकर न सिर्फ आतंकी ठिकाने तबाह किए बल्कि पाकिस्तान के 11 एयरबेस उड़ा दिए. लेकिन हार पर भी तमगा देना कोई पाकिस्तान से सीखे. डिफेंस एक्सपर्ट के मुताबिक, सरकार का यह फैसला बताता है कि पाकिस्तान की सेना अब सिर्फ मोरल मैनेजमेंट तक सिमट कर रह गई है. मैदान में उनकी कोई ताकत नहीं बची.
भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ने 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ मिलकर सिर्फ 13 दिन में पाकिस्तान की सेना को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर किया था. नतीजा बांग्लादेश का निर्माण और 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों की शर्मनाक कैद. उनकी रणनीति, शौर्य और राजनयिक समझदारी का आज भी पूरी दुनिया लोहा मानती है. अगर मानेकशॉ के सामने जनरल मुनीर को खड़ा किया जाए, तो यह वैसा ही है जैसे किसी नौसिखिए स्कूली ड्रामा कलाकार को ऑस्कर विजेता अभिनेता से मिलाकर देखा जाए.











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