नोएडा : मंगलवार रात अचानक सीमा को पानी और रोशनी से डर लगने लगा। परिजन उसे उपचार के लिए जेवर सीएचसी ले गए। जहां डॉक्टरों ने सेक्टर-39 जिला अस्पताल के लिए रेफर किया था। यहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। सही इलाज नहीं मिलने पर परिजन पूरी रात घूमते रहे।
यूपी के ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर के थ्योरा गांव में रैबीज संदिग्ध गाय के दूध के सेवन परिवार और गांव के अन्य लोग सहमे हुए हैं। महिला के साथ गांव के अन्य लोगों ने शुक्रवार को जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचकर एहतियातन एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाई है। वहीं महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के लिए टीम गठित कर जांच शुरू की है। टीम ने महिला के घर पहुंचकर परिवार से महिला की मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी ली है। वहीं नोडल अधिकारी ने जेवर सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी के अलावा महिला का इलाज करने वाले डॉक्टर से रिपोर्ट मांगी है।
जेवर थाना क्षेत्र के थ्योरा गांव निवासी मुकेश सिंह के पड़ोस में रहने वाली एक महिला के यहां करीब दो महीने पहले गाय ने बछड़े को जन्म दिया था। मुकेश की पत्नी सीमा (40) ने बछड़ा पैदा होने के बाद निकले दूध (खीज) का सेवन किया था। करीब डेढ़ माह पूर्व गाय में रैबीज के लक्षण दिखने पर पशुपालक ने उसका इलाज प्राइवेट पशु चिकित्सक से कराया था। पशु चिकित्सक की सलाह पर गाय पालने वाले परिवार के तीन सदस्यों ने रैबीज का इंजेक्शन लगवाया था। लेकिन सीमा और उसके परिवार के किसी सदस्य ने पहले एआरवी इंजेक्शन नहीं लगवाया था।
मंगलवार रात अचानक सीमा को पानी और रोशनी से डर लगने लगा। परिजन उसे उपचार के लिए जेवर सीएचसी ले गए। जहां डॉक्टरों ने सेक्टर-39 जिला अस्पताल के लिए रेफर किया था। यहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। सही इलाज नहीं मिलने पर परिजन पूरी रात घूमते रहे। कहीं इलाज नहीं मिलने पर परिजन महिला को बुधवार को घर ले आए थे। लेकिन बृहस्पतिवार सुबह सीमा की अचानक मौत हो गई थी। परिजनों ने नम आंखों के साथ महिला का अंतिम संस्कार किया है। महिला की मौत से परिवार में मातम छाया है। वहीं जेवर सीएचसी प्रभारी डॉ. मोहम्मद शर्फे जेया का कहना है कि केंद्र में एआरवी उपलब्ध है। तीन दिन में अब तक 25 लोगों ने गाय के संपर्क में आने की बात कही है। इस कारण उन्हें एआरवी लगाई गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रैबीज संक्रमित गाय का दूध पीने से रैबीज होने की संभावना बहुत ही कम होती है। इसका कारण यह है कि रैबीज वायरस मुख्य रूप से लार के माध्यम से फैलता है। यह पाचन तंत्र में जीवित नहीं रहता क्योंकि पेट का एसिड इसे नष्ट कर देता है। लेकिन यदि दूध उबाला नहीं गया है, तो उसमें वायरस के ट्रेसेस हो सकते हैं। अगर किसी महिला के मुंह में घाव है और वह संक्रमित दूध पीती है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। लेकिन अगर अगर दूध को अच्छी तरह उबाल लिया जाए, तो रैबीज वायरस नष्ट हो जाता है।
एंटी रैबीज के नोडल अधिकारी डॉ. टीकम सिंह का कहना है कि रैबीज संदिग्ध गाय के दूध के सेवन से महिला की मौत की संभावना कम है। जांच शुरू कर दी है। सीएचसी प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है। वहीं जहांगीरपुर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अक्षय का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। लैब रिपोर्ट के बिना यह कहना गलत होगा कि गाय को रैबीज है। वहीं मृतक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बिना यह नहीं कहा जा सकता है कि महिला की मौत रैबीज से हुई है। वहीं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय त्रिपाठी का कहना है कि आदेश मिलने पर जांच होगी।
थोरा गांव के रहने वाले निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कुत्तों का काफी ज्यादा आतंक है। कुत्तों के काटने से रोजाना लोग घायल हो रहे हैं। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। जो गांव और कस्बों में आवारा कुत्ते घूम रहे हैं। उसको लेकर कोई उचित प्रबंध करने चाहिए।











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