नई दिल्ली। लोकसभा में आज सुबह कार्यवाही शुरू होते ही सदन गमगीन हो गया। सदस्यों ने हाल ही में दिवंगत हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष शिवराज पाटिल के निधन पर शोक व्यक्त किया, साथ ही 24 साल पहले संसद भवन पर हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शिवराज पाटिल: एक लंबा संसदीय करियर-
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को शिवराज पाटिल के निधन की सूचना दी। उन्होंने बताया कि पाटिल का शुक्रवार सुबह महाराष्ट्र के लातूर में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
बिरला ने पाटिल के लंबे और गौरवशाली राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे 7वीं से 13वीं लोकसभा तक सात बार सदन के सदस्य रहे। उन्होंने 1991 से 1996 तक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। पाटिल ने उच्च कोटि की संसदीय मर्यादाओं के निर्माण में अहम योगदान दिया।
संसदीय सुधारों के प्रणेता-
उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पहलें हुईं:
विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही मजबूत करने के लिए विभागों से संबंधित संसदीय समितियों का गठन किया गया। ‘उत्कृष्ट सांसद सम्मान’ की शुरुआत भी उन्हीं के कार्यकाल में हुई।
केंद्र में गृह मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों का कार्यभार संभालने के अलावा, पाटिल पंजाब और राजस्थान के राज्यपाल तथा महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे।
संसद हमले के शहीदों को नमन-
अध्यक्ष ओम बिरला ने 13 दिसंबर 2001 को संसद परिसर में हुए आतंकी हमले के वीरों को भी याद किया। उन्होंने कहा, “आज 13 दिसंबर को हमारे संसद भवन पर हुए कायरतापूर्ण हमले के 24 वर्ष पूरे हो रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि उस दिन आतंकवादियों ने लोकतंत्र के पवित्र मंदिर पर हमला किया था, जिसे सुरक्षा बलों के जवानों ने नाकाम कर दिया था। इस दौरान संसद की सुरक्षा सेवा, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आठ सुरक्षा कर्मियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
सदन ने इन सभी महान आत्माओं की स्मृति में कुछ देर मौन रखा और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।











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