नई दिल्ली। नवंबर की शुरुआत में देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर हवाई सेवाओं के संचालन में भारी बाधा आई थी, जिससे अकेले दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर लगभग 800 उड़ानें प्रभावित हुईं थीं। इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) ने ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम में खराबी को इसका कारण बताया था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने संसद में एक लिखित बयान में स्वीकार किया है कि यह बाधा एक साइबर हमले का परिणाम थी, जिसमें दिल्ली सहित प्रमुख हवाई अड्डों पर आने और जाने वाले विमान ‘जीपीएस स्पूफिंग’ का शिकार हुए थे। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने राज्यसभा में यह जानकारी दी, जिसके बाद यह गंभीर खुलासा हुआ।
क्या है जीपीएस स्पूफिंग?
जीपीएस स्पूफिंग एक तरह का साइबर हमला है, जिसमें हैकर्स नकली जीपीएस सिग्नल भेजते हैं ताकि किसी भी डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई जा सके। यह हमला विमानों के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह कर देता है, जिससे पायलट को गलत दिशा में जाने का भ्रम होता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। यह खासकर कम विजिबिलिटी में विमानों के लिए बेहद खतरनाक होता है।
सरकार के आंकड़े और बचाव के उपाय-
सरकार ने लोकसभा में बताया था कि नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र (अमृतसर और जम्मू) में 465 जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं दर्ज की गईं।
आईएटीए (IATA) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 4.3 लाख जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग घटनाएं हुईं, जो 2023 की तुलना में 62% अधिक थीं।
सरकार ने बताया कि इस तरह के खतरों से निपटने के लिए परंपरागत, जमीन पर आधारित नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि सैटेलाइट नेविगेशन बाधित होने पर भी उड़ानें सुरक्षित रहें।
विमानन सुरक्षा पर बढ़ते खतरे-
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली जैसे सुरक्षित एयरस्पेस में जीपीएस स्पूफिंग की घटना भारत की विमानन सुरक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी चेतावनी है। इस घटना से पता चलता है कि आधुनिक विमानन प्रणाली साइबर हमलों के प्रति कितनी संवेदनशील है और बचाव के लिए मजबूत उपाय करने की आवश्यकता है।











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