नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महत्वपूर्ण ‘प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक 2025’ (Securities Market Code Bill 2025) पेश किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का विपक्षी दलों ने पुरजोर विरोध किया, जिसके बाद इसे विस्तृत समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति (Standing Committee) को भेज दिया गया है।
विपक्षी सांसदों ने विधेयक के प्रावधानों पर गंभीर संवैधानिक सवाल उठाए-
मनीष तिवारी (कांग्रेस): उन्होंने नियम 71(1) का हवाला देते हुए कहा कि यह विधेयक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को अत्यधिक अधिकार दे रहा है। उन्होंने इसे ‘शक्ति के पृथक्करण’ के सिद्धांत का उल्लंघन और अनुच्छेद 21 व 22 के विरुद्ध बताया। तिवारी ने आरोप लगाया कि इससे संसद का अधिकार कम होगा और निजी निकायों की शक्ति बढ़ेगी।
अरुण नेहरू (DMK): उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि सभी अधिकार एक ही नियामक (SEBI) को सौंपना संसदीय अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप है।
सरकार का पक्ष: “चर्चा के लिए स्थायी समिति का विकल्प खुला”-
विपक्ष के हंगामे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि विधेयक पेश करने के चरण में विरोध का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सरकार स्वयं इसे स्थायी समिति को भेजने का प्रस्ताव रख चुकी है। वहां सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए ही इस विधेयक को समिति के पास भेजने की सिफारिश की गई है।











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