मेरठ। पश्चिम उत्तर प्रदेश में मौसम के सबसे सख्त मिजाज और 14 सालों का रिकॉर्ड तोड़ने वाली हाड़ कंपाती ठंड भी किसानों के हौसलों को पस्त नहीं कर पाई है। मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। गन्ना भवन पर दिन-रात डटे किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
खबर की मुख्य बातें-
महापंचायत का एलान: प्रशासन के साथ गुरुवार को हुई लंबी वार्ता बेनतीजा रहने के बाद भाकियू ने 21 तारीख को बड़ी महापंचायत करने की घोषणा कर दी है।
प्रशासनिक वार्ता विफल: गुरुवार को कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी ने भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी सहित 5 नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया था। करीब एक घंटे की बातचीत में कमिश्नर ने लखनऊ स्तर पर समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन किसान मौके पर ही ठोस निर्णय की मांग पर अड़े रहे, जिससे वार्ता विफल हो गई।
गन्ना दफ्तर पर ताला: इससे पहले किसानों ने उपगन्ना आयुक्त कार्यालय पर ताला जड़ दिया और कड़ाके की ठंड के बावजूद कार्यालय के बाहर ही जमीन पर लेटकर विरोध जताया।
विवाद की मुख्य वजह: जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के अनुसार, गन्ना मिलों ने इस साल खरीद के नियमों में बदलाव कर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नया नियम ‘इंडेंट’ से अधिक गन्ने को स्वीकार नहीं कर रहा और स्वीकार करने पर अगले इंडेंट में कटौती कर दी जा रही है। साथ ही ट्रांसपोर्ट भाड़े में 3 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
कड़ाके की सर्दी का कहर: मेरठ में गुरुवार का दिन पिछले 14 वर्षों में सबसे ठंडा रहा, लेकिन इसके बावजूद भारी संख्या में किसान, जिनमें मेजर चिंदौड़ी, सुनील, विनोद और हापुड़ जिलाध्यक्ष दिनेश खेड़ा शामिल हैं, आंदोलन पर डटे हुए हैं।
ये हैं किसानों की मांगें-
-हाड़ा पिछले वर्ष के अनुरूप घटाया जाए
-पिछले साल के नियमों के आधार पर चलें मिलें
-रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने का मूल्य पिछले वर्षों के तहत बढ़ाया जाए
-जारी इंडेंट से अधिक गन्ना मिलों के द्वारा लिया जाए
-मोड परिवर्तन वाली व्यवस्था में सुधार हाे
-अधिकारी गन्ना भवन में बैठें
महापंचायत में राकेश टिकैत आ सकते हैं-
वार्ता विफल होने के बाद भाकियू ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। आगामी 21 तारीख को गन्ना भवन पर एक विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी। जिलाध्यक्ष ने संकेत दिए हैं कि इस महापंचायत में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और अन्य शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं। देर रात तक एडीएम सिटी समेत भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी किसानों को समझाने के लिए मौके पर मौजूद रहे।
रागिनी की तान और हौसले की गर्मी-
जहां एक ओर प्रशासन ठंड से बचाव के लिए स्कूलों के समय बदल रहा है और रैन बसेरों की व्यवस्था कर रहा है वहीं गन्ना भवन का नजारा कुछ अलग ही है। यहां 60 से 80 साल तक के बुजुर्ग किसान खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं। रात के समय ठंड को मात देने के लिए रागिनी और संगीत का सहारा लिया जा रहा है। जंगेठी निवासी किसान राजबीर ने बताया कि धरनास्थल पर ही खाने-पीने और दूध की सामुदायिक व्यवस्था की गई है।











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