मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में रविवार को पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के लिए एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जाट समुदाय के नेतृत्व में आयोजित किया गया था, लेकिन अन्य समुदायों के लोगों ने भी इसमें बड़ी संख्या में भाग लिया। हज़ारों लोगों ने इस कार्यक्रम में शामिल होकर पूर्व राज्यपाल को श्रद्धांजलि दी और समाज व किसानों के लिए उनके योगदान को याद किया।
सभा में किसान नेता चौधरी नरेश टिकैत, मुज़फ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक, उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे।
भीम आर्मी के अध्यक्ष विनय रतन ने अपने संबोधन में कहा कि जब उन्होंने सत्यपाल मलिक के जीवन और विचारों को पढ़ा, तो महसूस हुआ कि वे एक सच्चे जननेता थे, जिन्होंने सत्ता की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और हमेशा किसानों के साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा, “मैं संकल्प लेता हूं कि सत्यपाल मलिक के पदचिन्हों पर चलकर आगे की राजनीति करूंगा।”
सांसद हरेंद्र मलिक ने मंच से तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सत्यपाल मलिक ने अपने जीवन के 30 वर्ष जिस पार्टी को दिए, उसी ने उन्हें अंतिम समय में अपमानित किया। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्य है कि एक ईमानदार नेता को उसकी अपनी पार्टी ने सम्मान नहीं दिया। सत्यपाल मलिक किसी सम्मान के मोहताज नहीं थे, लेकिन जो व्यवहार उनके साथ हुआ वह शर्मनाक है।”
सभा में चौधरी युद्धवीर सिंह ने भी सत्यपाल मलिक के समाज और किसानों के लिए किए गए संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि सत्यपाल मलिक ने पूरा जीवन ईमानदारी से समाज सेवा को समर्पित किया और अंत समय तक किसानों के मुद्दों पर बेबाकी से बोलते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में भी उन्हें डराने का प्रयास किया गया, जो बेहद निंदनीय है।
श्रद्धांजलि सभा ने न केवल एक नेता को याद किया बल्कि वर्तमान राजनीतिक हालातों पर गंभीर प्रश्न भी खड़े किए। वक्ताओं ने सत्यपाल मलिक के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही और उनके संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।










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