शामली। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में MLC किरणपाल कश्यप ने जनहित से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मामला उठाते हुए सरकार का ध्यान नाले की सफाई में बरती जा रही लापरवाही की ओर आकर्षित किया। उन्होंने सदन में अधिकारियों द्वारा कागजों पर की गई सफाई और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर किया।
अधिकारियों के दावे को बताया गलत-
एमएलसी किरणपाल कश्यप ने सदन को अवगत कराया कि मुंडभर भाज्जू से भौराकलां होते हुए कुरावा तक जाने वाला नाला क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लिए मुसीबत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने लिखित रूप में जानकारी दी है कि वर्ष 2024-25 में नाले की सफाई करा दी गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई केवल मशीन से ‘ऊपर-ऊपर’ की गई है, जबकि कहीं भी गहराई से खुदाई नहीं हुई।
गांवों पर तबाही का खतरा-
सदन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया कि नाला ऊंचाई पर है और आसपास के गांव निचले स्तर पर बसे हैं। बिना गहरी खुदाई के पानी की निकासी मुमकिन नहीं है। बरसात के दिनों में नाला ओवरफ्लो होने से किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं और लोगों के घरों में पानी भर जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नाले की पूर्ण सफाई वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित है, तो तब तक होने वाली बारिश और जलभराव से ग्रामीणों को कौन बचाएगा?
तत्काल खुदाई की मांग-
किरणपाल कश्यप ने सरकार से मांग की कि नाले की सफाई में हुई लापरवाही की जांच कराई जाए और तत्काल प्रभाव से इसकी गहन खुदाई एवं पूरी सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि आने वाले समय में मुंडभर भाज्जू, भौराकलां और कुरावा क्षेत्र के गांवों को जलभराव और तबाही से बचाया जा सके।











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