नई दिल्ली: भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स… इस नाम को पढ़कर अगर आप सोच रहे हैं कि यह केंद्र सरकार का कोई पुलिस बल है, तो ऐसा नहीं है। ना ही ये पुलिस या सुरक्षाबलों से जुड़ा कोई संगठन है। ये नाम है उस फर्जी सेंटर का, जो उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में चल रहा था। इस सेंटर में दो से तीन लाख रुपये लेकर वादा किया जाता था कि अगर आपने यहां ट्रेनिंग ली, तो भारतीय सेना या निजी सुरक्षा एजेंसियों में आपकी नौकरी पक्की। सेंटर का कर्ताधर्ता था 40 वर्षीय अरविंद कुमार पांडे, जो खुद को भारतीय सेना का रिटायर्ड कैप्टन बताता है। फर्जीवाड़े के इस खेल में उसके साथ सुमित्रा सेनापति नाम की उसकी दूसरी पत्नी भी शामिल थी, जो खुद को उसकी असिस्टेंट बताती थी।
अरविंद कुमार पांडे के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश उस वक्त हुआ, जब तेलंगाना के एक पिता-पुत्र उसकी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे। इन लोगों की शिकायत के बाद मैनपुरी पुलिस ने अरविंद और सुमित्रा को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, कहानी महज इतनी सी नहीं है। गिरफ्तार किया गया अरविंद तो ठगी का पुराना खिलाड़ी निकला। उसके पकड़े जाने के बाद अब उसकी चौंकाने वाली ठगी की कहानियां सामने आ रही है। आइए, आपको सिलसिलेवार सबकुछ बताते हैं।
सेना भर्ती के नाम पर फर्जी ट्रेनिंग सेंटर चलाने वाला अरविंद कुमार पांडे मूल तौर पर हरियाणा के फरीदाबाद का रहने वाला है। खुद को सेना का रिटायर्ड कैप्टन बताने वाला अरविंद 10वीं तक भी पढ़ा-लिखा नहीं है। साल 2011 में उसकी शादी शिकोहाबाद में रहने वाली निधि यादव से हुई। शादी के बाद अरविंद दो बच्चों का पिता बना और 2014 में परिवार को फरीदाबाद छोड़कर, मैनपुरी आ गया।
मैनपुरी में उसने एक मोबाइल की दुकान खोली और ठगी के धंधे में उतर गया। अरविंद के पास जो लोग मोबाइल की सिम लेने के लिए आते थे, वह उनसे डॉक्यूमेंट लेकर, उनके नाम पर लोन करा लेता था। इस काम को वह इतनी सफाई से अंजाम देता कि लोगों को भनक तक नहीं लगती थी कि उनके नाम पर कोई लोन लिया गया है। इन डॉक्यूमेंट के जरिए वह फर्जी तरीके से उन लोगों को भी सिम बेचता था, जिनके पास पहचान से जुड़ी कोई आईडी नहीं होती थी।
मोबाइल की दुकान से कमाई तो हो रही थी, लेकिन अरविंद के सपने बड़े थे। उसने इस दुकान को बंद किया और हिंदुस्तान दंत मंजन नाम से एक फर्जी कंपनी खोल ली। यहां कुछ समय तक फर्जीवाड़ा करने के बाद साल 2019 में उसने मिस इंडिया प्रतियोगिता के नाम पर लड़कियों को ठगना शुरू किया। प्रतियोगिता के जरिए मॉडलिंग के ऑफर दिलाने के नाम पर उसने कई लड़कियों से रकम ऐंठी। हालांकि, जब यहां उसकी दुकानदारी नहीं जमी, तो उसने राजनीतिक दल बना लिया।
अपने राजनीतिक दल की मेंबरशिप के नाम पर वह लोगों से रकम ठगता और बदले में उन्हें बड़े-बड़े सपने दिखाता था। कुछ समय बाद उसने एक एंटी करप्शन ब्यूरो खोला। इस ब्यूरो का मकसद था, नौकरीपेशा लोगों को भ्रष्टाचार के केस में फंसाने का डर दिखाकर उनसे रुपये लेना। अब अरविंद कुछ बड़ा करना चाहता था और इसके लिए उसने एक तरकीब निकाली। उसने मैनपुरी के किशनी इलाके में भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स नाम से एक सेंटर खोला और युवाओं को सेना या सुरक्षा एजेंसी में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने लगा।
इस सेंटर के प्रचार के लिए उसने एक यूट्यूब चैनल बनाया और ट्रेनिंग के वीडियो वहां अपलोड करने शुरू किए। धीरे-धीरे उसकी पहचान बढ़ी और सेंटर में लोग आने लगे। एक स्टूडेंट से अरविंद 2 से 3 लाख रुपये फीस लेता था। खुद को भारतीय सेना का रिटायर्ड कैप्टन बताने वाला अरविंद आर्मी की वर्दी पहनकर रहता था, ताकि लोग उसके झांसे में आ जाएं। युवाओं को बेवकूफ बनाने के लिए वह फर्जी अवार्ड और तस्वीरें भी दिखाता था।
इतना ही नहीं, उसके सेंटर में ट्रेनिंग लेने वाले युवकों को नए एडमिशन लाने पर कमीशन भी मिलता था। पुलिस के मुताबिक, सरकारी कार्यालयों और सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर उसने लगभग 600 युवकों को ठगा है। पुलिस ने उसके पास से फर्जी जॉइनिंग लेटर, मेडिकल, शपथ-पत्र, किराए के डीड, एग्रीमेंट, आधार कार्ड, अशोक चक्र वाले स्टिकर, वर्दी, मोबाइल और टैबलेट बरामद किए हैं। पुलिस अब उसके दूसरे साथियों की भी तलाश कर रही है।
मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली सुमित्रा सेनापति भी साल 2023 में ट्रेनिंग के लिए अरविंद के फर्जी सेंटर में आई थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब उसे नौकरी नहीं मिली, तो उसने धमकी दी कि वह अरविंद की असलियत सबको बताएगी। इसपर अरविंद ने एक तरकीब निकाली। उसने सुमित्रा को अपने ही सेंटर में मोटी सैलरी पर नौकरी पर रख लिया, ताकि उसकी पोल ना खुले। कुछ वक्त बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और अरविंद ने सुमित्रा से शादी कर ली।











Discussion about this post