नई दिल्ली। संसद में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G RAM-G) विधेयक पर चर्चा के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों द्वारा कागज फाड़ने और मेजों पर चढ़ने जैसी घटनाओं पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने विपक्ष के इस आचरण को ‘लोकतंत्र को कलंकित करने वाला’ बताया।
“जवाब सुनना नहीं चाहता विपक्ष”-
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने बुधवार देर रात तक 98 सांसदों के विचारों को धैर्यपूर्वक सुना, लेकिन जब उनके जवाब देने की बारी आई, तो विपक्ष ने अमर्यादित व्यवहार शुरू कर दिया। उन्होंने सवाल किया, “संसद में कागज फाड़ना और टेबल पर चढ़ना क्या बापू के आदर्शों की हत्या नहीं है? किसी को बोलने न देना कौन सी संसदीय परंपरा है?”
मनरेगा बनाम वीबी जी-राम-जी: आंकड़ों से दिया जवाब-
कृषि मंत्री ने सदन में आंकड़े पेश करते हुए यूपीए और एनडीए सरकार के कामकाज की तुलना की:
बजट आवंटन: उन्होंने बताया कि नई योजना के लिए 1,51,282 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है।
खर्च का अंतर: यूपीए के 8 वर्षों (2006-14) में कुल 2,13,220 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि एनडीए सरकार ने 2024-25 तक 8,53,810 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
काम और रोजगार: एनडीए सरकार में 862 लाख काम पूरे हुए, जो यूपीए के 153 लाख के मुकाबले कई गुना अधिक हैं। वहीं, श्रम दिवसों को भी 1660 से बढ़ाकर 3210 किया गया है।
रोजगार की नई गारंटी-
शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत’ के लिए ‘विकसित गांव’ पीएम मोदी का संकल्प है। इस नई योजना के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर भ्रष्टाचार रोकने और विकास को गति देने के लिए नई योजना लाई जा रही है, तो इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए?











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