मुजफ्फरनगर। देश में नकली दवाओं की बढ़ती समस्या के बीच मुजफ्फरनगर में एक बड़ा मामला सामने आया है। स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीर खतरा पहुंचाने वाले इस मामले में एक दवा कारोबारी ने करीब 3.50 करोड़ रुपये की नकली एंटी एलर्जी दवाएं खरीदीं और बिना बिलिंग के इन्हें बाजार में बेचने का आरोप है। औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए आरोपी कारोबारी को गिरफ्तार किया है। यह मामला आगरा में हुए नकली दवा कांड से सीधे जुड़ा हुआ है।
पुलिस और औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी तरुण गिरधर गांधी कॉलोनी में स्थित ‘आयुष मेडिकोज’ का संचालक है। टीम ने मंगलवार देर रात उसकी दुकान और गोदाम पर छापेमारी की, जिसमें उसके लैपटॉप, मोबाइल और दस्तावेज जब्त किए गए। जांच में पता चला कि तरुण गिरधर ने आगरा की बंसल मेडिकल एजेंसी से नकली एलेग्रा और रोजोवाश टैबलेट खरीदी थी, लेकिन उसने इन दवाओं के वैध बिक्री रिकार्ड नहीं रखे थे। दुकान से कोई दवा बरामद नहीं हुई, जिससे जाहिर होता है कि दवाएं पहले ही बाजार में सप्लाई कर दी गई हैं।
इससे पहले, 22 अगस्त को आगरा में नकली दवा सिंडीकेट का खुलासा हुआ था, जिसमें पुलिस, प्रशासन और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने कई प्रतिष्ठानों पर छापे मारे थे। जांच में पता चला कि पिछले डेढ़ वर्ष में बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी समेत 12 राज्यों में 200 करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाओं की सप्लाई की गई है।
25 अगस्त को मुजफ्फरनगर में सात मेडिकल स्टोर्स पर औषधि विभाग की टीम ने छापेमारी की थी, जिनमें आयुष मेडिकोज भी शामिल था। जांच के बाद मंगलवार को आयुष मेडिकोज के संचालक तरुण गिरधर को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है।










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