नई दिल्ली। गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी और एक महिला को गिरफ्तार किया है। इन पर सैन्य प्रतिष्ठानों और कर्मियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी एजेंटों को देने का आरोप है।
गिरफ्तार किए गए आरोपी-
अजय कुमार सिंह: बिहार के रहने वाले अजय कुमार सिंह 2022 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद गोवा में एक डिस्टिलरी में काम कर रहे थे। एटीएस के मुताबिक, एक पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी ने ‘अंकिता शर्मा’ बनकर उन्हें भारतीय सेना की रेजिमेंट की गतिविधियों और प्रमुख सैन्य अधिकारियों के तबादलों के बारे में जानकारी देने के लिए लालच दिया था।
रश्मि पाल: मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली 35 वर्षीय रश्मि पाल को दमन से गिरफ्तार किया गया, जहाँ वह ट्यूशन पढ़ाती थी। एटीएस का कहना है कि वह ‘प्रिया ठाकुर’ की नकली पहचान बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर सेना के लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर जानकारी निकालती थी।
जासूसी का तरीका-
हनीट्रैप: पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी सोशल मीडिया पर भारतीय महिलाओं के नाम से नकली प्रोफाइल बनाकर भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते थे।
मालवेयर का इस्तेमाल: जांच में पता चला है कि अजय सिंह को एक ट्रोजन मालवेयर फ़ाइल भी भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करने के बाद पाकिस्तानी एजेंट उसके फोन से गोपनीय जानकारी निकाल सकते थे।
वित्तीय लेनदेन: रश्मि पाल कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के लिए बैंक खाते खोलकर वित्तीय लेनदेन भी करती थी।
कैसे जाल में फँसा पूर्व सैनिक-
2022 में संपर्क: अजय कुमार सिंह 2022 में पाकिस्तानी जासूस ‘अंकिता शर्मा’ के संपर्क में आया था, जब वह नगालैंड के दीमापुर में सेना में सूबेदार के पद पर तैनात था।
विश्वास हासिल किया: पाकिस्तानी एजेंट ने दोस्ती करके और विश्वास जीतकर उससे संवेदनशील सैन्य जानकारी हासिल की।
यह गिरफ्तारी भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता है और यह उजागर करती है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके जासूसी नेटवर्क चला रही हैं।











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