लखनऊ। चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और पुराने, जर्जर नक्शों की समस्याओं को खत्म करने के लिए अब जीपीएस आधारित उच्च तकनीक का सहारा लिया जाएगा। चकबंदी विभाग नए सिरे से जमीनों के डिजिटल नक्शे तैयार करेगा, जिससे जमीन के रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद कब्जे के बीच का अंतर खत्म हो जाएगा।
कैसे काम करेगा जीपीएस रोवर?
सटीक मापन: जीपीएस में रोवर एक आधुनिक उपकरण है जो गाटा संख्या के अनुसार, जमीन का रकबा सेंटीमीटर तक की सटीकता से ऑनलाइन मापेगा।
अतिक्रमण का खुलासा: अगर किसी व्यक्ति के रिकॉर्ड में दो एकड़ जमीन दर्ज है, लेकिन मौके पर वह ढाई एकड़ पर काबिज है, तो यह विसंगति नए नक्शे में स्पष्ट रूप से दर्ज होगी।
लागत: इस काम के लिए राजस्व परिषद ने 20 करोड़ रुपये से अधिक के रोवर खरीदे हैं, जिसका इस्तेमाल चकबंदी विभाग करेगा।
ग्राम समाज की जमीन का चिह्नांकन-
नई तकनीक से ग्राम समाज की जमीनों, जैसे बंजर और परती भूमि की भी पहचान की जाएगी।
विभाग का प्रयास है कि ग्राम समाज की जमीन को एक ही स्थान पर चकों के रूप में लाया जाए, ताकि इसका उचित उपयोग हो सके।
प्रक्रिया से लाभ-
जमीनी विवादों में कमी: सटीक डिजिटल नक्शे बनने से जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी।
अवैध कब्जों पर लगाम: सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जों को हटाने में मदद मिलेगी।
पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और धांधली की शिकायतें दूर होंगी।










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