शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर के चौक कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने सोमवार को नकली नोट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस गिरोह का मास्टरमाइंड पैथोलॉजिस्ट डॉ. नफीस अहमद है। वह नकली नोट छपाने का पूरा सेटअप लेकर कार से शाहजहांपुर में किराये पर रहने के लिए आ रहा था। पुलिस ने घेराबंदी कर नफीस समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से 4.61 लाख रुपये के नकली नोट मिले।
एसपी राजेश द्विवेदी ने कहा कि आरोपियों में मुरादाबाद जिले के थाना कुंदरकी के कमालपुर फतेहाबाद निवासी डॉ. नफीस अहमद, उत्तराखंड के ऊधमसिंह जिले के थाना ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के मोहल्ला तीन पानी डाम फुलसूंगा रुद्रपुर निवासी पंकज गंगवार व शाहजहांपुर की चौक कोतवाली क्षेत्र की आनंदपुरम कॉलोनी निवासी निखिल मिश्रा हैं। पुलिस ने नकली नोट छापने के उपकरणों को कब्जे में ले लिया है। पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाली बातें बताई हैं।
आरोपी नफीस व पंकज गंगवार ने पुलिस पूछताछ में बताया कि कोरोना काल में लॉकडाउन लगने के बाद दोनों बेरोजगार हो गए थे। आरोपियों ने बताया कि वे एक-एक रुपये के लिए मोहताज हो गए थे। तब उन लोगों ने अपराध की दुनिया में कदम रखा और नकली नोट बनाना शुरू किया। प्रिंटर के माध्यम से नकली नोट छापने के बाद आसपास के जनपदों में जाकर चला देते थे। नकली नोट को छोटे-मोटे कारोबारियों को भी दे देते थे। अब शाहजहांपुर में अपना सेटअप लगाकर नकली नोटों को चलाने के लिए आए थे। इससे पहले वे कभी नहीं पकड़े गए थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 500 रुपये के 840 नकली नोट, 100 रुपये के 370 नोट, 50 रुपये के 64 नोट, 20 रुपये के 40 नोट मिले। दो प्रिंटर, लैमिनेशन मशीन, नोट कटिंग पेपर आदि मिले। आरोपी नफीस ने पूछताछ में बताया कि पंकज गंगवार ने अलग-अलग जिलों में नकली नोट चलाने के लिए तीन महीने पहले कार लोन पर ली थी। इसकी किस्त भी अभी नहीं निपट पाई है। उसके बाद इसी कार से नकली नोट खपाने निकलते थे। कार के अंदर बैठकर भी नकली नोट बना लेते थे। एसपी ने बताया कि गैंग में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे 20 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से ब्रोकर को नकली नोट देते थे। नफीस ने बताया कि बेरोजगारी के चलते उसने रामपुर जिले के थाना शाहाबाद क्षेत्र के रमाना गांव के रहने वाले जाकिर से नकली नोट बनाना सीखा था। कोरोना काल में जाकिर की मौत हो गई थी। इसके बाद से वह अपने साथियों के साथ यही काम कर रहा है। इस सफलता पर एसपी ने चौक कोतवाली इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह की हौसला अफजाई की। टीम को 20 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की।
नफीस ने सन 2011 में तमिलनाडु से पैथोलॉजिस्ट की डिग्री ली थी। इसके बाद उसने अपना काम किया, लेकिन वह चला नहीं। कोरोना काल में रुपयों की अधिक जरूरत पर पर इस धंधे में उतर आया। उसने उत्तराखंड के पंकज को जोड़ा और अपना काम शुरू किया। एसपी ने बताया कि आरोपी डॉ. नफीस ने पूछताछ में बताया है कि उसने नकली चांदी भी बनाने का काम किया था, लेकिन वह चल नहीं सका। काम बंद कर दिया गया था।
आरोपी नफीस पर कुल छह मुकदमे दर्ज हैं। गौतमबुद्धनगर में एक, अमरोहा में तीन और मुरादाबाद में दो मुकदमे दर्ज हैं। पहली बार नफीस पर 2018 में गौतमबुद्धनगर के थाना ईकोटेक तृतिया में केस दर्ज हुआ था। इसके बाद सन 2021 में अमरोहा में दो केस दर्ज हुए। 2022 में अमरोहा पुलिस ने गैंगस्टर लगाई। इसके बाद 2022 में मुरादाबाद जिले के मझोला थाने में एक और 2023 में भोजपुर थाने में एक मुकदमा दर्ज हुआ था।
चौक कोतवाली पुलिस को पूछताछ में नफीस ने बताया कि वह अब तक नोएडा व अमरोहा जिले में 10-15 लाख रुपये की नकली करेंसी चला चुका है। शाहजहांपुर में उसने निखिल मिश्रा को डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में तैयार किया था। लेकिन, यहां आते की उसे पकड़ लिया गया।











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