लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अदाणी पावर लिमिटेड से 5.38 रुपये प्रति यूनिट की दर से रोजाना 1500 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी। यह खरीद ऊर्जा बिड प्रक्रिया के माध्यम से 25 वर्षों तक होगी। ऊर्जा विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। विभाग का दावा है कि इससे उत्तर प्रदेश पाॅवर काॅर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को करीब 2958 करोड़ रुपये की बचत होगी।
प्रदेश में वर्ष 2033-34 तक ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए लगभग 10,795 मेगावाट की अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की आवश्यकता है। इसके लिए 1600 मेगावाट क्षमता की तापीय परियोजना से कुल 1500 मेगावाट ऊर्जा खरीद के लिए बिडिंग प्रक्रिया में अदाणी पाॅवर लिमिटेड की न्यूनतम बिड को स्वीकार किया गया है। इस बिड में फिक्सड चार्ज 3.72 रुपये प्रति यूनिट, फ्यूल चार्ज 1.65 रुपये प्रति यूनिट यानी कुल टैरिफ 5.38 रुपये प्रति यूनिट की न्यून्तम बिड है। ऐसे में अदाणी पाॅवर लिमिटेड को सफल बिडर घोषित किया गया है।
ऊर्जा विभाग का दावा है कि इस बिडिंग प्रक्रिया से यूपीपीसीएल को 25 वर्षों में लगभग 2958 करोड़ रुपए की बचत होगी। यह नई परियोजना मौजूदा और आगामी तापीय परियोजनाओं की तुलना में कहीं ज्यादा किफायती है। जहां जवाहरपुर, ओबरा, घाटमपुर, पनकी जैसी परियोजनाओं से बिजली 6.6 रुपये से लेकर 9 रुपये प्रति यूनिट तक मिल रही है, वहीं प्रस्तावित इस परियोजना के तहत 2030-31 में प्लांट के शुरू होने के बाद बिजली सिर्फ 6.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से प्राप्त होगी।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि शर्त थी कि जब यह प्लांट उत्तर प्रदेश में लगेगा तभी बिजली खरीदेंगे। प्रक्रिया के तहत जुलाई 2024 में रिक्वेस्ट फॉर क्वालीफिकेशन इश्यू किया था, जिसमें सात कंपनियां आईं। इनमें से पांच कंपनियों ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल में हिस्सा लिया। जिस कंपनी का कोटेशन (5.38 प्रति यूनिट) सबसे कम था, उसे स्वीकार कर लिया गया। इसी टैरिफ पर 25 वर्षों की अवधि के लिए पाॅवर सप्लाई एग्रीमेंट (पीएसए) हस्ताक्षरित किया जाएगा।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्ययन के अनुसार, राज्य को वर्ष 2033-34 तक लगभग 10,795 मेगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की जरूरत होगी। इसके साथ ही 23,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लिए भी रोडमैप तैयार किया गया है। तापीय ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए डीबीएफओओ मॉडल के तहत बिड प्रक्रिया शुरू की गई। डीबीएफओओ यानी डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन और ऑपरेट एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें निजी कंपनी परियोजना का निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन खुद करती है। सरकार सिर्फ कोयला लिंकेज देती है और बिजली खरीदती है।










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