नई दिल्ली : पाकिस्तान में हाल फिलहाल में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं. हाल ही में एक-दो दिन पहले भी पाकिस्तान की धरती कांपी थी और भूकंप आया था. अब तक पड़ोसी मुल्क में तीन-चार बार भूकंप के झटके आ चुके हैं. जिसके बाद दावा किया गया कि पाकिस्तान में कुछ असामान्य गतिविधि चल रही है. इन झटकों ने सोशल मीडिया पर कई सवालों को जन्म दिया था. जिसमें कहा गया था कि पाक में जरूरी स्थानों पर हवाई हमले के बाद इस्लामाबाद तक परमाणु परीक्षण हुआ है. सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे थे कि ये कोई प्रकृतिक भूकंप नहीं है, बल्कि संभव है कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है.
हालांकि एनसीएस प्रमुख ने पाकिस्तान द्वारा किए गए संभावित परमाणु परीक्षण को दावों को खारिज कर दिया था. तो क्या सच में पाकिस्तान में परमाणु बम फटने पर भूकंप आया था? अगर सच में परमाणु बम फटे तो शॉकवेव कितनी होती है.
कुछ जानकारों की मानें तो पाकिस्तान में हाल में आए भूकंप परमाणु परीक्षणों का नतीजा हो सकते हैं. लोगों का शक पूरी तरह से बेबुनियाद नहीं है. पाकिस्तान पहले भी भूमिगत परमाणु परीक्षण कर चुका है. पाकिस्तान का सबसे महशूर परमाणु परीक्षण 1998 में चगाई हिल्स में किया गया था. ऐसे परीक्षणों से जमीन में हलचल उत्पन्न होती है. जिसे सीस्मोग्राफ पकड़ सकता है. इसीलिए कुछ लोग मानते हैं कि हाल ही में आए झटके सिर्फ नेचुरल नहीं हैं, ये परमाणु परीक्षण की वजह से भी हो सकते हैं.
पाकिस्तान में परमाणु परीक्षण के बाद आने वाले भूकंप को लेकर नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के निदेशक ओ. पी. मिश्रा ने नकार दिया है. उनका कहना है कि नेचुरल भूकंप और परमाणु विस्फोट दोनों अलग होते हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो जब कोई परमाणु हथियार फटता है, तो रोशनी की एक तेज चमक दिखाई देती है, जैसे कि बिजली का एक विशाल बोल्ट हो. यह एक निश्चित दायरे में सब कुछ अंधा कर देता है और जला देता है. अगर आपको चेतावनी नहीं दी गई है तो इस थर्मल विकिरण से बचने का कोई मौका नहीं होता है.
परमाणु बम फटते ही एक शॉकवेव आती है. शॉकवेव बहुत हिंसक होती है कि यह कई किलोमीटर दूर घरों और लोगों को कुचल देती है. भारी शॉकवेव कई सौ किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकती है. विस्फोट स्थल के पास मौजूद लोग सिर्फ शॉकवेव से ही मारे जा सकते हैं. लंबी दूरी पर दबाव शरीर के अंदर नुकसान पहुंचाता है जैसे कि फेफड़ों को नुकसान, कान के परदे का फटना और आंतरिक रूप से खून बहना, लेकिन दबाव की लहर सबसे ज्याया अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचाती है. इमारतें ढह जाती हैं और लोग दब जाते हैं. लोग सामान पर गिर जाते हैं. कांच, ईंट, कंक्रीट और लकड़ी के टुकड़े इधर-उधर चले जाते हैं और लोगों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं.











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