नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दुबई में रह रहे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर जसमीत सिंह हकीमजादा के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर एक बड़े ‘नार्को-टेरर’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी के अनुसार, हेरोइन की तस्करी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) की आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा था।
इस मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-
आतंकी साजिश का खुलासा: दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में दायर आरोप पत्र के अनुसार, हकीमजादा ने KLF के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक आपराधिक साजिश रची थी। ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले मुनाफे को भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को फाइनेंस करने में लगाया जा रहा था।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: जांच में सामने आया कि हकीमजादा और उसके सहयोगियों को फरवरी 2019 में ही अमेरिका के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) द्वारा विशेष रूप से नामित नार्कोटिक्स किंगपिन की सूची में शामिल किया गया था।
नेटवर्क के प्रमुख चेहरे: ईडी ने आरोप पत्र में निम्नलिखित लोगों की भूमिका स्पष्ट की है-
जसमीत सिंह हकीमजादा: दुबई स्थित मुख्य तस्कर और मनी लॉन्ड्रर।
हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी: पाकिस्तान में रहकर हेरोइन की सप्लाई करने वाला KLF का कथित प्रमुख।
जजबीर सिंह समरा और वरिंदर सिंह: भारत में ड्रग्स की खेप प्राप्त करने और बेचने वाले मुख्य हैंडलर।
हवाला ऑपरेटर: निर्मल सिंह, सतपाल सिंह, हीरालाल और हरजीत सिंह उर्फ बग्गा जैसे ऑपरेटरों ने ड्रग्स के पैसे को विदेश भेजने में मदद की।
जांच का आधार: यह मामला जनवरी 2020 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है। ईडी की जांच से पता चला है कि पाकिस्तान से भेजी गई हेरोइन को भारत में बेचकर प्राप्त की गई नकदी को विभिन्न हवाला माध्यमों से घुमाया गया ताकि आतंकी नेटवर्क को सक्रिय रखा जा सके।
यह कार्रवाई भारत में सक्रिय अलगाववादी समूहों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के बीच गहरे गठजोड़ को उजागर करती है।











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