देश। पूर्वी चंपारण जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल से एक खतरनाक ‘नार्को-आतंक’ (Narco-Terror) नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) ने स्थानीय हरैया थाना पुलिस के सहयोग से भारतीय सेना के एक भगोड़े जवान और उसके सहयोगी को दबोच लिया है।
नेपाल भागने की फिराक में था ‘फौजी’-
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव के अनुसार, गिरफ्तार मुख्य आरोपी की पहचान राजबीर सिंह उर्फ फौजी के रूप में हुई है। वह नेपाल के रास्ते विदेश भागने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से 500 ग्राम हेरोइन और एक हैंड ग्रेनेड बरामद किया है। इससे पहले पुलिस ने उसके सहयोगी चिराग को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से 407 ग्राम हेरोइन और एक 9mm पिस्टल मिली थी।
जासूसी और हरियाणा ग्रेनेड हमले में संलिप्तता-
जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
पाक हैंडलरों से सीधा संपर्क: राजबीर 2022 में सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी खुफिया हैंडलरों के संपर्क में आया था। वह हेरोइन की खेप के बदले भारतीय सेना की संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान को भेज रहा था।
सिरसा हमला: ये दोनों आरोपी हरियाणा के सिरसा स्थित महिला पुलिस थाने पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश में भी शामिल थे। इन्होंने ही हमलावर गुरजंत सिंह को ग्रेनेड और पैसे मुहैया कराए थे।
सेना से फरार: राजबीर ने 2011 में सेना जॉइन की थी, लेकिन फरवरी 2025 में वह ड्यूटी से फरार हो गया। उसके खिलाफ अमृतसर में जासूसी और ‘ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट’ के तहत मामला दर्ज है।
नेटवर्क का विस्तार-
एसएसओसी की एआईजी डी. सुदरविझी ने बताया कि राजबीर न केवल खुद जासूसी कर रहा था, बल्कि उसने अन्य सैन्य कर्मियों को भी पाकिस्तानी हैंडलरों से मिलवाने की कोशिश की थी। उसका सहयोगी चिराग फाजिल्का का रहने वाला है और राजबीर के लिए कूरियर (ड्रग्स डिलीवरी) का काम करता था।
बड़ी कामयाबी-
भारत-नेपाल सीमा पर हुई इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सेना के और कितने लोग इस नेटवर्क के जाल में फंसे हुए हैं।











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