देश। मैथिल ठाकुर ये नाम आज पूरे भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है। कारण यह है कि वह सबसे कम उम्र ने विधायक बन गई। हालांकि, मैथिल का जीवन सफर बहुत संघर्ष के साथ ही जल्दी ही सफलता वाला रहा है। कम उम्र में बॉलीवुड सिंगिंग, लोक गीत, ब्रांड एंबेसडर और विधायक का सफर पूरा कर लिया है।
किसे पता था कि 20 जुलाई 2000 को बिहार के एक छोटे शहर मधुबनी में जन्मी एक बच्ची का नाम पूरे भारतवर्ष में इतना लोकप्रिय हो जाएगा। शुरुआती लाइनों से आप समझ ही गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं। तो चलिए शुरू करते हैं।
मधुबनी के बेनीपट्टी प्रखंड स्थित उड़ेन गांव की रहने वाली मैथिली आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। अपनी कठिन साधना और संगीत के बदौलत महज 25 साल की उम्र में ही देश के सभी घरों में उनकी पहचान बन चुकी है। ये मुकाम हासिल करना छोटी मोटी बात नहीं है उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास और ईश्वर ने भी असीम कृपा दृष्टि दी है।
मैथिली के जीवन की शुरुआत काफी संघर्षमय रही। पिता रमेश ठाकुर और दादा गायन और तबला बजाने का कार्य करते थे। इसलिए उनकी रुचि भी संगीत के क्षेत्र में ही गई। उनके पिता साल 1997-98 के दौरान परिवार के साथ दिल्ली पहुंच गए और वहां से शुरू हुआ संघर्षरत जीवन।
साल 2000 में 25 जुलाई के दिन इनके घर किलकारी गूंजी। नाम रखा गया ‘मैथिली’। आर्थिक स्थिति इनके परिवार की बेहतर नहीं थी फिर भी गुजारा चलाया जा रहा था। पिता के मन में कसक थी कि जो छाप वो नहीं छोड़ पाए वो मैथिली के जरिए पूरा किया जाए। और मैथिली को संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए पिता बचपन से ही रियाज कराने लगे।
फिर यहीं से शुरू होती है उनकी संगीत साधना। महज 5 सला की उम्र में ही मैथिली ने हिंदी- मैथिली सहित कई भाषाओं में गीत गाना शुरू कर दी। हालांकि, उनके करियर में उछाल तब आया जब 11 साल की आयु में वो रियलिटी शो लिटिल चैंप्स का हिस्सा बनी।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। साल 2016 में वो इंडियन आईडल जूनियर का हिस्सा रही, वहीं 2017 में उन्हें राइजिंग स्टार रियलिटी शो का उपविजेता घोषित किया गया। धीरे-धीरे वो घर-घर में पहचाने जा लगी। हालांकि, वो कहती हैं कि अगर मैं गायक नहीं बनती तो आज IAS होती।
इसके बाद मैथिली ने कई गीतों को अपनी आवाज से पिरोया. जिसमें “नगरी हो अयोध्या सी”,”तुम उठो सिया श्रृंगार करो” और “आजू मिथिला नगरिया निहाल सखिया”को काफी प्रसिद्धि मिली। बॉलीवुड सिंगिंग में वो सफलता नहीं मिल पा रही जो चाहिए फ़िर उन्होंने लोक गीत यानि कि मैथिली भाषा को प्राथमिकता दी और आज वो भारतीय संस्कृति का मानने वाले के लिए घर-घर छाप छोड़ दी है।
इसके बाद मैथिली को बिहार सरकार ने राज्य खादी ग्रामोद्योग का ब्रांड एम्बेसडर बनाया. वहीं साल 2023 में नेशनल इंस्ट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट का भी उन्हें ब्रांड एम्बेसडर घोषित किया गया। साथ ही इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की और से भी उन्हें स्वीप आइकॉन बनाया गया।
मैथिली के करियर का सबसे बड़ा ब्रेक इस साल तब आया. जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने बिहार चुनाव में अलीनगर से अपना प्रत्याशी बनाया। भारी विरोध और भारी जनसमर्थन के साथ वो इस सीट से निर्वाचित होने वाली बिहार की सबसे कम उम्र की विधायिका बन गई है।
महज 25 साल की आयु में संगीत से राजनीतिक तक का मैथिली का यह सफर बेहद शानदार रहा है। अब उनके ऊपर संगीत और राजनीति दोनों को बराबर दृष्टिकोण से देखने की जिम्मेदारी है। हालांकि, उनके हौसले ने यह तो बता दिया कि इंसान संघर्ष करते रहे तो सफलता मिलने में देर नहीं लगती।











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