नोएडा। गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में कुख्यात अपराधी सुंदर भाटी समेत उसके गिरोह के 10 सदस्यों को नौ-नौ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे जमा न करने पर दो-दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
2015 में दर्ज हुआ था केस-
जानकारी के अनुसार, कुख्यात बदमाश सुंदर भाटी समेत उसके गैंग के 10 सदस्यों पर वर्ष 2015 में कासना थाना पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई पूरी की।
जिन आरोपियों को दोषी पाते हुए सज़ा सुनाई गई है, उनमें शासन द्वारा चिह्नित माफिया सुंदर भाटी (निवासी घंघोला), सिंहराज, विकास पंडित, योगेश, ऋषिपाल, बॉबी उर्फ शेर सिंह, सोनू, यतेन्द्र चौधरी, अनूप भाटी और दिनेश भाटी शामिल हैं।
सजा पूरी कर रिहा हुआ सुंदर भाटी-
अदालत में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जमानत पर बाहर आए सुंदर भाटी, सिंहराज और ऋषिपाल पेश हुए। सजा सुनाए जाने के बाद सिंहराज व ऋषिपाल को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। खास बात यह है कि सुंदर भाटी इस मामले में पहले ही अपनी सजा पूरी कर चुका था, इसलिए उसे अदालत ने रिहा कर दिया।
हरेंद्र नागर हत्याकांड में भी हुई थी आजीवन कारावास की सजा-
गौरतलब है कि सुंदर भाटी को चार साल पहले सपा नेता हरेंद्र नागर हत्याकांड में पहली बार सजा हुई थी। 25 मार्च 2021 को जिला न्यायालय ने सुंदर भाटी समेत 12 बदमाशों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट से सुंदर भाटी को उस मामले में जमानत मिल गई थी।
बदनाम अपराधी सुंदर भाटी को 2021 में गौतम बुद्ध नगर की एक अदालत ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। हालांकि, 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे ज़मानत दे दी। अपने सभी मामलों में ज़मानत मिलने के बाद सुंदर भाटी जेल से रिहा हो गया। वह फिलहाल जेल से बाहर है। सुंदर भाटी की रिहाई के बाद यह डर पैदा हो गया कि ज़िले में फिर से सत्ता की लड़ाई शुरू हो जाएगी। पुलिस भी ज़्यादा सतर्क हो गई। सुंदर भाटी और स्क्रैप माफिया रवि काना के बीच विवाद चल रहा है। सुंदर भाटी को रवि काना के भाई हरेंद्र की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। पुलिस ने स्क्रैप माफिया रवि काना पर कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल रवि काना जेल में बंद है। गैंगस्टर एक्ट के मामले में भले ही सुंदर भाटी को नौ साल की सजा सुनाई गई है, लेकिन सुंदर भाटी को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, सजा के बावजूद कुख्यात सुंदर भाटी को जेल नहीं जाना पड़ा। पुलिस के अनुसार सुंदर भाटी इस मुकदमे में जेल मे रहने के दौरान अपनी सजा पूरी कर चुका है। इसके चलते अदालत ने सुंदर भाटी को रिहा कर दिया।
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुंदर भाटी का 30 साल का आपराधिक साम्राज्य है। राजनीतिक गलियारों में उसकी अच्छी पैठ है। पैठ भी ऐसी कि वह जेल में रहने के दौरान खेल प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के साथ पुरस्कार बांटता था। जनवरी 2015 में उसका गौतमबुद्धनगर जिला जेल के अंदर से फोटो वायरल हुआ था, जिसे जेल के एक अधिकारी ने ही भेजा था। जरायम की दुनिया में आने से पहले सुदंर भाटी बुलंदशहर का ट्रांसपोर्ट ठेकेदार हुआ करता था।
इस दौरान, राजनेताओं के साथ उसके संबंध बढ़े, और वह राजनीतिक हत्याओं में शामिल होने लगा। सुंदर की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं थीं। इसी बीच, उसका साथी नरेश भाटी जिला पंचायत चेयरमैन बन गया। बाद में, आरोप लगा कि सुंदर ने चेयरमैन नरेश भाटी की हत्या कर दी थी। उसके बाद, सुंदर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने लगातार कई अपराध किए। सुंदर भाटी के गैंग की मुख्य गतिविधियों में रंगदारी, सुपारी लेकर हत्याएं करना, स्क्रैप मेटल के ठेके हासिल करना और स्टील चोरी करना शामिल है। पहले, कुछ सीनियर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उसे सपोर्ट किया था, जबकि अभी अफवाह है कि उसे कई बड़े बीजेपी नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है। पुलिस के अनुसार, कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी यूपी के मुख्यमंत्री की 65 सबसे वॉन्टेड अपराधियों की लिस्ट में शामिल है। यह भी कहा जाता है कि उसके पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश) के कई बड़े माफिया सरगनाओं से सीधे संबंध हैं।











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