मेरठ। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) मेरठ यूनिट ने 45 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए कर्नाटक से एक अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह ने फर्जी दस्तावेज और ओटीपी की मदद से लोगों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों के चालान जारी किए। इस गिरोह के जरिए करीब 248 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाए गए, जिन पर 45 करोड़ रुपये का टैक्स बनता है। गिरोह का सरगना और एक अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
यह मामला मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र के गांव बड़सू निवासी अश्वनी गुप्ता की शिकायत के बाद सामने आया। 2 सितंबर 2024 को अश्वनी ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दी थी कि एयरपोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर एक महिला ने उनसे व्हाट्सएप के जरिये आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल और हाईस्कूल की मार्कशीट मांगी। ओटीपी भी फोन पर ले लिया गया। रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1750 रुपये भी ट्रांसफर कराए गए। कुछ ही समय बाद उनके नाम पर “AK ट्रेडर्स” नाम की एक फर्म जीएसटी पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो गई, जिसके जरिए करोड़ों के फर्जी बिल अपलोड किए गए।
अश्वनी की शिकायत के आधार पर जब जांच की गई, तो पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था ने इसकी जांच एसटीएफ को सौंप दी। एसटीएफ मेरठ यूनिट ने तकनीकी सर्विलांस के जरिये गिरोह की लोकेशन ट्रेस कर ली और कर्नाटक के कैपेगोड़ा नगर, बंगलुरू से राजस्थान के रहने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए आरोपी राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं और आपस में रिश्तेदार हैं। इनमें शामिल हैं:
- रतना राम (गांव गोलिया गरवा, थाना आजीटी)
- ओमप्रकाश (गांव गोलिया गरवा, थाना आजीटी)
- हनुमान राम (गांव गोलिया गरवा, थाना आजीटी)
- बुद्धाराम (गांव दबड़, थाना गुडामालानी)
- संतोष कुमार (गांव डाबड, थाना गुडामालानी)
इनके कब्जे से 13 मोबाइल फोन, एक प्रिंटर, विभिन्न कंपनियों की आठ बिल बुक, चार रबड़ की मुहरें, एक नंबरिंग मशीन, चार चेक बुक और तीन कारें बरामद की गईं। सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुजफ्फरनगर लाया गया है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि ये आरोपी 100 से अधिक फर्जी कंपनियों के नाम पर ई-वे बिल और इनवॉइस जारी करते थे, जिससे कंपनियों को जीएसटी चोरी का रास्ता मिल जाता था। इन कंपनियों के नाम पर बड़े-बड़े ट्रांजेक्शन दिखाए जाते थे, लेकिन असल में कोई व्यापार नहीं होता था। गिरोह के दो मुख्य सरगना अभी फरार हैं। एसटीएफ ने उनकी पहचान कर ली है और उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है।










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