नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा ‘मनरेगा’ योजना के नाम में बदलाव किए जाने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शनिवार को कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नाम बदलने, ब्रांडिंग और पैकेजिंग करने में मोदी सरकार का कोई मुकाबला नहीं है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अब यह साफ हो गया है कि भाजपा सरकार को सिर्फ पंडित नेहरू से ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से भी नफरत है।
महात्मा गांधी से ‘बापू’ तक का सफर: कांग्रेस का एतराज-
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से चली आ रही ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (मनरेगा) से ‘महात्मा गांधी’ शब्द हटाकर उसे ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ कर दिया गया है। जयराम रमेश ने सवाल उठाया, “आखिर सरकार को महात्मा गांधी के नाम से क्या दिक्कत है? पूज्य बापू कहने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन स्थापित नाम से ‘महात्मा गांधी’ हटाना उनकी गहरी नफरत को दर्शाता है।”
“ब्रांडिंग और पैकेजिंग के मास्टर हैं मोदी”-
जयराम रमेश ने मोदी सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि योजनाओं और कानूनों के नाम बदलने में यह सरकार धुरंधर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:
निर्मल भारत अभियान को बदलकर स्वच्छ भारत अभियान किया गया।
ग्रामीण एलपीजी वितरण कार्यक्रम को उज्ज्वला का नया नाम दिया गया।
रमेश ने कहा, “पुरानी योजनाओं को नई पैकेजिंग और चमकदार ब्रांडिंग के साथ पेश करना ही इस सरकार की असली कला है। काम वही रहता है, बस नाम बदल दिया जाता है।”
नेहरू के बाद अब गांधी पर निशाना?
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि देश जानता था कि पीएम मोदी और उनकी सरकार को पंडित जवाहरलाल नेहरू से चिढ़ है, लेकिन अब यह नफरत राष्ट्रपिता तक पहुँच गई है। उन्होंने सरकार की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बदलाव केवल नाम का नहीं, बल्कि वैचारिक द्वेष का परिणाम है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल-
मनरेगा के नाम में इस बदलाव के बाद एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ‘नामकरण की राजनीति’ पर बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक प्रतीकों को मिटाने की कोशिश करार दिया है, जबकि सरकार की ओर से इसे अधिक सम्मानजनक संबोधन देने का तर्क दिया जा रहा है।











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