मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के ‘कानून के राज’ के दावों की पोल उस समय खुली, जब मुजफ्फरनगर के जानसठ रोड पर स्थित विवादित द्वारका सिटी में अवैध निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के 15 दिन बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम सदर निकिता शर्मा के नेतृत्व में एमडीए और पुलिस की टीम ने द्वारका सिटी में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही बिल्डरों ने निर्माण कार्य रोक दिए, जिससे ताकतवर लोगों की हनक का अंदाजा लगाया जा सकता है।
एसडीएम सदर निकिता शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में निरीक्षण किया गया। चल रहे सभी निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त आगे के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
द्वारका सिटी का मामला लंबे समय से विवादों में है। दक्षिणी सिविल लाइन निवासी गुंजन गुप्ता की 3280 वर्ग मीटर जमीन इस कॉलोनी में शामिल हो गई थी। जब गुंजन ने अपनी जमीन पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की कोशिश की, तो विकास प्राधिकरण ने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी जमीन द्वारका सिटी का हिस्सा है। इसके बाद गुंजन गुप्ता ने कानूनी लड़ाई शुरू की।
जांच में पता चला कि द्वारका सिटी में 11,380 वर्ग मीटर सरकारी जमीन (चकरोड और नाली) पर बिल्डरों ने अवैध कब्जा कर लिया और उस पर निर्माण कर दिया। नियमों के अनुसार, बिल्डर को इतनी ही जमीन या समकक्ष मूल्य की जमीन सरकार को देनी होती है, लेकिन द्वारका सिटी के मालिक अजय बंसल ने ऐसा नहीं किया। गुंजन गुप्ता ने इस अवैध कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से की। तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने एक जांच समिति गठित की, जिसमें एसडीएम सदर निकिता शर्मा, एसडीएम खतौली संजय सिंह, एसडीएम बुढ़ाना प्रवीण कुमार और जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व जेबा जमील शामिल थे।
समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बिल्डर ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया। इसके आधार पर 25 जून 2024 को अपर जिलाधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने अजय बंसल को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा। लेकिन बंसल ने जवाब देने के बजाय तत्कालीन सहारनपुर (वर्तमान में मेरठ) मंडल आयुक्त डॉ. हृषीकेश भास्कर यशोद से संपर्क किया। मंडलायुक्त ने जांच समिति की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए 9 जुलाई 2024 को बिल्डर द्वारा प्रस्तावित जमीन को राजस्व अभिलेख में दर्ज करने का आदेश दे दिया, जो नियमों का उल्लंघन था।
गुंजन गुप्ता ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया, जिसके बाद कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया।











Discussion about this post