मुजफ्फरनगर। जनपद में अवैध और नशीली दवाओं के कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए ड्रग्स विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। आज मुजफ्फरनगर के ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य के नेतृत्व में विभाग की एक विशेष टीम ने शहर के व्यस्तम जिला परिषद मार्केट में ताबड़तोड़ छापेमारी की।
तीन जिलों की टीम ने घेरा मार्केट-
कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस छापेमारी में मुजफ्फरनगर के साथ-साथ मेरठ और बुलंदशहर के ड्रग्स इंस्पेक्टर भी शामिल रहे। टीम ने मार्केट में पहुंचते ही संदिग्ध मेडिकल स्टोरों की घेराबंदी कर दी, जिससे दवा कारोबारियों में अफरा-तफरी मच गई।
लाइसेंस और स्टॉक की गहन जांच-
संयुक्त टीम ने मेडिकल स्टोरों पर पहुँचकर निम्नलिखित बिंदुओं पर बारीकी से जांच की:
लाइसेंस का सत्यापन: क्या मेडिकल स्टोर वैध लाइसेंस पर चल रहे हैं?
दवाओं का स्टॉक: क्या दुकान में प्रतिबंधित या नशीली दवाएं छिपाई गई हैं?
बिक्री रजिस्टर: नशीली दवाओं (Schedule H1) की बिक्री का रिकॉर्ड नियमानुसार रखा जा रहा है या नहीं?
सख्त संदेश: जेल जाएंगे नशीली दवा बेचने वाले-
ड्रग्स विभाग की यह कार्रवाई उस वक्त हुई है जब दो दिन पहले ही दो मेडिकल स्टोर मालिकों को नशीली दवाएं बेचने के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा।
अभी और होगी कार्रवाई-
विभाग के अनुसार, जांच अभी जारी है और संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में कुछ और मेडिकल स्टोरों पर गाज गिर सकती है और लाइसेंस निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई भी संभव है।










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