मेरठ। यह सवाल इन दिनों मेरठ के हापुड़ अड्डा स्थित भगत सिंह मार्केट में घूम रहा है। वहां के व्यापारियों को न तो चोरी की चिंता है और न ही बदमाशों की – बल्कि अब उन्हें पुलिस का डर सता रहा है।कारण? पुलिस सब-इंस्पेक्टर ने खुद को ‘रेडीमेड रॉबिनहुड’ समझ लिया, बस फर्क इतना कि वो गरीबों को नहीं, खुद को लूट का माल दे गया।
घटना बिल्कुल फिल्मी है—दरोगा साहब दिनदहाड़े दुकान में दाखिल होते हैं, चार थैले कपड़ों से भरते हैं और ऐसे निकल जाते हैं जैसे रक्षाबंधन पर बहन के लिए साड़ी खरीदकर जा रहे हों। दुकान के मालिक सीताराम सिंघल को कुछ समझ आता, उससे पहले दरोगा जी ‘ड्यूटी कॉल’ कहकर नदारद हो गए। लेकिन क्या करें, दुकान में CCTV था, और वो भी चालू !
अब दरोगा जी को सीताराम जी ने फुटेज दिखाया, तो उम्मीद थी कि गलती मान लेंगे, शर्मिंदा होंगे। मगर नहीं, दरोगा साहब तो इंस्पेक्टर ‘स्वाभिमान’ निकले। बोले, “ये मेरा स्टाइल है!” और बदले में दुकान के बाहर खड़े हर ग्राहक को ऐसा घूरा, जैसे सबने चोरी में उसका साथ दिया हो। चालान काट-काट कर उन्होंने व्यापार बंदी दिवस की शुरुआत कर दी।
वीडियो वायरल हुआ, व्यापारियों का पारा चढ़ा, और पुलिस प्रशासन को मजबूरी में ‘ईमानदारी का नाटक’ करना पड़ा। एसएसपी साहब ने फौरन दरोगा जी को निलंबित कर दिया। अब वो सरकारी छुट्टी पर हैं, मगर विभागीय जांच ज़रूर चलेगी—कब तक, कोई नहीं जानता। शायद जब तक उनकी अगली दुकानदारी की योजना फेल ना हो जाए।
दरअसल मेरठ में ट्रैफिक पुलिस की छवि को बट्टा लगाने वाली शर्मनाक घटना सामने आई है। ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर (टीएसआई) सुमित वशिष्ठ का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह भगत सिंह मार्केट स्थित एक रेडीमेड गारमेंट्स की दुकान से कपड़े चोरी करते नजर आ रहा है।
यह घटना 10 जून को हापुड़ अड्डे के पास स्थित व्यस्त भगत सिंह मार्केट में हुई। सिंघल गारमेंट्स के मालिक सीताराम सिंघल के अनुसार, उस दिन दुकान में ग्राहकों की भीड़ थी। इसी दौरान टीएसआई सुमित वशिष्ठ दुकान में दाखिल हुआ और चार थैले कपड़ों से भरे चोरी कर चुपचाप वहां से निकल गया। यह पूरा वाकया दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि जब दुकानदार ने फुटेज देखने के बाद टीएसआई से बात की, तो उसने न केवल चोरी से इनकार किया, बल्कि उल्टा बदला लेने के लिए दुकान के बाहर खड़े ग्राहकों के चालान काटने शुरू कर दिए। इस हरकत से दुकान की बिक्री भी प्रभावित हुई और व्यापारी को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
इस घटना को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश है। व्यापारी नेता अजय गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और सख्त कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पुलिस विभाग पर भारी दबाव बना दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी विपिन ताडा ने एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र मिश्रा को जांच सौंपी। शुरुआती जांच में सुमित वशिष्ठ को दोषी पाए जाने पर तत्काल निलंबित कर दिया गया। विभागीय जांच जारी है।
व्यापारी नेता अजय गुप्ता ने कहा, “हमने सुना था कि पुलिस वाला घूस ले सकता है, पर ये तो खुद दुकान लूट रहा है।” व्यापारी वर्ग अब सुझाव दे रहा है कि ट्रैफिक पुलिस को ड्यूटी के साथ-साथ खरीदारी की लिमिट भी तय करनी चाहिए।तो कुल मिलाकर, मेरठ की सड़कों पर अब नया ट्रैफिक संकेत जुड़ गया है—“सावधान! आपके पीछे कोई दरोगा हो सकता है… थैला लिए हुए!”











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