नई दिल्ली। जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सस्ता संभाली है, तब से वैश्विक अर्थव्यवस्था हिली हुई है. कभी वो टैरिफ हंटर चलाते हैं तो कभी आर्डर पर आर्डर दे रहे हैं. खुद को दुनिया के बॉस समझने वाले डोनाल्ड ट्रंप राजनेता से ज्यादा बिजनेसमैन बने हुए हैं, जो टैरिफ के टॉर्चर से दूसरे देशों से डील कर अमेरिका का खजाना भरना चाहते हैं. क्रेडिट लूटने में माहिर डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में चल रहे युद्ध को खत्म करवाने के दावे कर रहे हैं.

उन्होंने रूस को यूक्रेन के साथ 50 दिनों के भीतर युद्ध खत्म करने की धमकी दी है. हालांकि रूस ने पहले की तरह फिर से उनकी धमकियों की अनदेखी कर दी है. ट्रंप में अपनी धमकी में साफ कहा है कि अगर 50 दिन के भीतर रूस युद्ध खत्म नहीं करता है तो उसे भारी टैरिफ का सामना करना होगा. कहा कि रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100 फीसगी टैरिफ लगेगा. साफ है कि ट्रंप की ये धमकी इनडायरेक्ट तौर पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए हैं, जो रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदते हैं.
ट्रंप की धमकी से महंगा होगा पेट्रोल?
पावर गेम में रूस झुकने को तैयार नहीं है. अगर युद्ध की स्थिति बनी रही और ट्रंप ने रूस पर सेकेंडरी टैरिफ लगाया तोतेल की कीमतों में फर्क पड़ सकता है. भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता है. अपनी जरूरत का 35-40% कच्चा तेल रूस से आयात करता है. अगर ट्रंप की धमकी की वजह से रूस से तेल के आयात रूकते हैं तो भारत को इसकी वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी. रूस से सस्ते तेल के आयात रूकने पर तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है. अगर आपूर्ति बाधित होती है तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और उसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमत पर पड़ेगा.
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पूरी की माने तो रूस दुनिया की कुल खपत का 10 प्रतिशत आपूर्ति करता है. अगर यह हिस्सा बिल्कुल हटा दिया गया बाकी बचे 90 प्रतिशत से ही सारी दुनिया को तेल खरीदना पड़ेगा. जाहिर है कि कीमतें बढ़ेगीभारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं.
रूसी तेल पर कितना निर्भर भारत
भारत और चीन रूस के कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातक देश हैं. तेल मंत्रालय के मुताबिक भारत तेल के लिए आयात पर निर्भर है. वो अपनी ज़रूरत का करीब 88 प्रतिशत तेल आयात करता है. सबसे बड़ी बात की रूस के कुल तेल निर्यात का 38 प्रतिशत तेल सिर्फ भारत आता है. थिंक टैंक चैटम हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन युद्ध से पहले साल 2022 में भारत का रूसी तेल आयात 2 फीसदी से भी कम था. युद्ध के बाद रूस पर लगे प्रतिबंधों का भारत से फायदा उठाया और रूस से भरभर कर सस्ता तेल खरीदा.
रूस से तेल आयात घटने पर क्या होगा?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि रूस 9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक के साथ सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादकों में से एक है. रूसी तेल का योगदान लगभग 97 मिलियन बैरल की वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 10 फीसदी है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते अगर यह तेल बाजार से गायब हो जाता है तो जाहिर है कि तेल आपूर्ति में भारी कमी आएगी. सप्लाई कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आएगी. क्रूड ऑयल की कीमतें 130-140 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर निकल सकती है.
क्या है तेल पर भारत का सेकेंडरी प्लान ?
रूस के तेल पर प्रतिबंध लगा और यह तेल बाज़ार में नहीं आएगा तो निश्चित तौर पर दाम बढ़ेंगे. रूसी और अमेरिकी का लड़ाई में भारत बीच में आने से बचना चाहेगा. सस्ते तेल के चक्कर में भारत अमेरिका से पंगा लेने के बजाए दूसरे देशों के विकल्प की तलाश करेगा. हरदीप पूरी की माने तो भारत ने इसके लिए बेकअप प्लान तैयार कर रखा है.
उन्होंने कहा कि भारत जहां पहले 27 देशों से तेल खऱीद रहा था, अब वो 40 देशों से तेल का आयात कर रहा है. हालांकि रूस हमारा सबसे बड़ा सप्लायर रहा है. प्रतिबंध बढ़ने पर आपूर्ति थोड़ी बाधित होगी. एक ओर अमेरिका से ट्रेड डील फंसा है दूसरे ओर तेल पर अमेरिका ने नया दांव चल दिया है. हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत को जहां से भी कम दामों पर तेल मिलेगा, वह वहीं से खरीदेगा.











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