नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के विशाल बजट को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, कोयला क्षेत्र में सुधार के लिए ‘कोलसेटू नीति’ और वर्ष 2025 के लिए खोपरा (नारियल) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी मुहर लगाई गई है।
विश्व का सबसे बड़ा सांख्यिकीय अभ्यास: जनगणना 2027-
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2027 की जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक कार्य होगा। यह देश की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
प्रमुख घोषणाएं-
जाति गणना भी शामिल: मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बार की जनगणना में जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।
डिजिटल और स्व-गणना: पहली बार नागरिकों को ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प मिलेगा। ‘जनगणना-एक-सेवा’ (CaaS) के माध्यम से डेटा को डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराया जाएगा।
रोजगार के अवसर: इस महा-अभियान में लगभग 30 लाख जमीनी कार्यकर्ता शामिल होंगे, जिससे 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा।
दो चरणों में पूरा होगा काम-
जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 (बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026) तय की गई है। यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी-
पहला चरण (अप्रैल-सितंबर 2026): इसमें मकानों की सूची तैयार करना और आवास गणना (HLO) का कार्य होगा।
दूसरा चरण (फरवरी 2027): इसमें जनसंख्या की वास्तविक गिनती (PE) शुरू की जाएगी।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले-
कोलसेटू (COLSETU) नीति: कोयला लिंकेज को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता लाने के लिए इस नई नीति को मंजूरी दी गई है।
खोपरा MSP 2025: नारियल उत्पादक किसानों को राहत देते हुए 2025 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को नीतिगत मंजूरी दी गई है।
पृष्ठभूमि-
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना को स्थगित करना पड़ा था। अब 2027 में होने वाली यह जनगणना आधुनिक तकनीक और व्यापक डेटा के साथ देश के भविष्य की नीतियों का आधार बनेगी।
कोयले से जुड़ी सुधार नीति को कैबिनेट की मंजूरी-
केंद्रीय कैबिनेट ने ‘कोयला लिंकेज नीति में सुधार: कोलएसईटीयू’ को भी नीतिगत मंजूरी दी है। वैष्णव ने कहा, “भारत कोयले के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। 2020 में कोयले का वाणिज्यिक खनन शुरू हुआ, जिससे घरेलू कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। भारत ने 2024-25 में पहली बार एक वर्ष में 1 अरब टन कोयले के उत्पादन का आंकड़ा पार किया। 2024-25 में कुल उत्पादन 1.048 अरब टन रहा। खपत के प्रतिशत के रूप में आयात लगातार घट रहा है। 2024-25 में आयात में 7.9% की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 60,700 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।” रेल-कोयला साझेदारी के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष रेलवे के जरिए 823 मिलियन टन कोयले का परिवहन किया गया। घरेलू बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है।
इससे पहले, सरकार की कैबिनेट बैठक को लेकर कई बड़े दावे सामने आए। सूत्रों के अनुसार, मनरेगा का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ किए जाने पर विचार हो सकता है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम की पहचान और प्रभाव को नया रूप देने के उद्देश्य से यह बदलाव प्रस्तावित है।











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