मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में बच्चों की कहासुनी से शुरू हुआ छोटा सा विवाद अब दो संगठनों शिवसेना और क्रांतिसेना के बीच टकराव की जड़ बन गया है। रविवार रात रामपुरी निवासी रोहित धीमान के साथ हुई मारपीट का मामला सोमवार दोपहर जिला अस्पताल पुलिस चौकी पर उस समय गरमा गया, जब दोनों संगठनों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। पुलिस चौकी के अंदर कुर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते गाली-गलौज और हाथापाई में बदल गया।
दरअसल, मारपीट में घायल रोहित धीमान की शिफारिश लेकर क्रांतिसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा चौकी पहुंचे थे। दूसरी ओर, आरोपी पक्ष का समर्थन करने वाला लोकेश सैनी का शिवसेना गुट पहले से ही चौकी में कुर्सी पर विराजमान था। कुर्सी न मिलने पर ललित मोहन शर्मा भड़क गए, जिसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। ये मामला इतना बढ़ गया कि चौकी के अंदर ही हाथापाई की नौबत आ गई।
रविवार रात रोहित धीमान के साथ हुई मारपीट के पीछे बच्चों की आपसी लड़ाई थी। रोहित ने आरोप लगाया कि हाल ही में क्रांतिसेना छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए जितेंद्र गोस्वामी के बेटे के इशारे पर आकाश पाल ने उसे बुलाकर अज्ञात लड़कों से पिटवाया। इस मामले में फैसले के लिए लोकेश सैनी का शिवसेना गुट रात से सक्रिय था, वहीं ललित मोहन शर्मा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
इस पूरे प्रकरण में संगठनों की आंतरिक कलह और राजनीति भी साफ झलक रही है। लोकेश सैनी और मनोज सैनी कभी क्रांतिसेना का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन वैचारिक मतभेद के चलते उन्होंने संगठन छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया। इसके बाद से शिवसेना का प्रभाव बढ़ रहा है, जबकि क्रांतिसेना लगातार टूट की मार झेल रही है। जानकारों का मानना है कि इस छोटे से मारपीट के मामले को तूल देकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।
सोमवार दोपहर जिला अस्पताल पुलिस चौकी में हुई झड़प के बाद दोनों पक्षों में खींचतान जारी है। जहां क्रांतिसेना कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं शिवसेना अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबाने में लगी है। बच्चों की लड़ाई से शुरू हुआ ये विवाद अब संगठनों के बीच शक्ति प्रदर्शन का मैदान बन गया है।










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