मुजफ्फरनगर/शामली। पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली फैक्ट्रियों पर आंखें मूंदने वाले अधिकारियों के लिए बुरी खबर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के मुजफ्फरनगर क्षेत्रीय अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्हें “गैर-जिम्मेदार” करार दिया है। कोर्ट ने बोर्ड के सचिव को तत्काल प्रभाव से दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला शामली जिले के भट्टी माजरा मंगलौरा गाँव स्थित ‘मैसर्स कुबेर ट्रेडर्स’ का है। यह फैक्ट्री रिहायशी इलाके, स्कूल और मंदिर के पास अवैध रूप से संचालित हो रही थी। यहाँ बिना अनुमति के तारकोल और फर्नेस ऑयल जैसे खतरनाक पदार्थों का भंडारण व प्रसंस्करण किया जा रहा था, जिससे निकलने वाली जहरीली गैसों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया था।
अधिकारियों की मिलीभगत का ऐसे हुआ खुलासा-
पर्यावरणविद अमित कुमार ने कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश कर अधिकारियों की पोल खोल दी:
कागजी सीलिंग: साल 2019 में इस फैक्ट्री पर छापे और सीलिंग की कार्रवाई दिखाई गई थी।
बिजली बिल ने खोली पोल: दस्तावेजों से साबित हुआ कि सीलिंग के बावजूद फैक्ट्री में भारी औद्योगिक बिजली खपत जारी थी। इसका साफ मतलब था कि फैक्ट्री कभी बंद ही नहीं हुई और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी इसे संरक्षण देते रहे।
कोर्ट में निरुत्तर अधिकारी: सुनवाई के दौरान मुजफ्फरनगर के क्षेत्रीय अधिकारी कोर्ट को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके कि अवैध संचालन इतने वर्षों तक कैसे जारी रहा।
NGT की सख्त टिप्पणी और आदेश-
एनजीटी ने अधिकारियों की कर्तव्यहीनता को पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए घातक माना है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि:
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: बोर्ड के सदस्य सचिव तीन महीने के भीतर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगे और दोषी अफसरों को चिन्हित करेंगे।
भारी जुर्माना: प्रदूषण फैलाने वाली इकाई से भारी ‘पर्यावरण क्षतिपूर्ति’ (Environmental Compensation) वसूली जाएगी।
क्षेत्र में सुधार: जहरीली गैसों से प्रभावित हुए क्षेत्र में प्रदूषण सुधार कार्य (Remediation) कराए जाएंगे।










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