नई दिल्ली। यह कहानी ना तो किसी प्रेमी की बेवफाई की है, ना किसी हत्या की। यह है एक पागलपन भरे प्यार की सच्ची दास्तान, जहां एक शख्स ने मौत के बाद भी अपने प्यार की लाश के साथ कई साल गुजार दिए। साल 1931 में 22 साल की एलेना डी होयोस को टीबी हो गया। इलाज के लिए उसे फ्लोरिडा के मरीन अस्पताल में भर्ती किया गया। वहीं उसकी मुलाकात कार्ल टैंज्लर से होती है, जो रेडियोलॉजिक टेक्नीशियन था। उसने खुद को काउंट कार्ल वॉन कोजेल बताया।
टैंज्लर ने दावा किया कि उसने बचपन में एक सपने में एक काली बालों वाली महिला को देखा था, जो उसकी सच्ची प्रेमिका है। वह उसे एलेना में देखता था। कार्ल टैंज्लर ने एलेना को बचाने के लिए अजीबोगरीब इलाज किए। घरेलू टॉनिक, बिजली वाले उपकरण और झूठे वादे दिए। उसने एलेना से अपने प्यार का इजहार किया, लेकिन एलेना ने उसे कभी स्वीकार नहीं किया। अंततः 25 अक्टूबर 1931 को एलेना की मृत्यु हो गई।
कार्ल ने एलेना के अंतिम संस्कार का खर्च उठाया और अपने खर्च पर एक आलीशान मकबरा बनवाया, जिसकी चाबी सिर्फ उसी के पास थी। उसने हर रात कब्र पर जाना शुरू कर दिया। वह वहां गिफ्ट छोड़ता, बात करता, यहां तक कि एक टेलीफोन भी लगवा दिया था। उसका दावा था कि वह एलेना की आत्मा से बात कर सकता था।
एलेना की मृत्यु के दो साल बात 1933 में कार्ल टैंज्लर ने चुपचाप एलेना की लाश को मकबरे से निकाल कर अपने घर ले आया। अगले सात वर्षों तक वह उसके साथ एक इंसान की तरह रहता रहा।
उसने लाश को संरक्षित किया। हड्डियों को कोट हैंगर और तार से जोड़ा। चेहरे को मोम और प्लास्टर से दोबारा बनाया। आंखों में कांच की आंखें लगाईं। एलेना के असली बालों से विग बनाया। परफ्यूम और रसायनों से बदबू छुपाई। उसने एलेना की लाश को कपड़े पहनाए, जेवर पहनाए और अपने ही बिस्तर में सुलाया। 1940 में एलेना की बहन को शक हुआ और उसने कार्ल के घर जाकर सच का खुलासा किया। वहां उसे एलेना की क्षत-विक्षत लेकिन सजी-धजी लाश मिली।
कार्ल टैंज्लर को कब्र से लाश चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, लेकिन स्टेच्यूट ऑफ लिमिटेशन की वजह से उस पर कोई केस नहीं चला। चौंकाने वाली बात यह रही कि उस समय की अमेरिकी जनता ने टैंज्लर को एक सच्चा प्रेमी माना। अखबारों में उसे “ट्रेजेडी के प्रेमी” के रूप में दिखाया गया।
एलेना के शव को एक बार फ्यूनरल होम में आम जनता को दिखाया गया, जिसे देखने 6,000 लोग आए। बाद में उसे एक गुप्त कब्र में दफनाया गया, ताकि कोई दोबारा उसे ना निकाल सके। 1952 में, कार्ल टैंज्लर की मौत हो गई। कहा जाता है कि मरने के समय भी उसके पास एलेना जैसी एक बड़ी गुड़िया थी, जो उसके साथ रहती थी।











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