मुरादाबाद। जेल में बंदी की आत्महत्या पर जेल प्रशासन ने पर्दा डालने की कोशिश की। देररात तक अधिकारी बताते रहे कि बंदी शौचालय में गिर गया था। मृत्यु होने के बावजूद उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां डॉक्टरों ने चेक किया तो उसकी सांसें पहले ही थम चुकी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट रिपोर्ट ने जेल प्रशासन की लापरवाही की कलाई खोल दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की बात सामने आई तो लखनऊ तक हड़कंप मच गया। आनन फानन में डीआईजी जेल कुंतल किशोर मुरादाबाद पहुंच गए और उन्होंने जेल का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था चेक की।
डीआईजी जेल ने आसे उर्फ आशाराम की बैरक में जाकर जांच पड़ताल की। इसके अलावा जेल अस्पताल को भी देखा। उन्होंने अधिकारियों से बात की और पूरे मामले की जांच की जिसमें बताया गया कि पांच दिन पहले बंदी को बुखार आया। इसके बाद उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार शाम करीब चार बजे यह शौचालय के लिए गया और गमछे को फंदा बनाकर लटक गया था। इतना सब कुछ होने के बावजूद जेल प्रशासन ने इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की थी। बंदी की मौत की खबर के बाद अधिकारी अलर्ट हो गए। इसकी जानकारी मिलने पर बंदी के परिजन भी मुरादाबाद पहुंच गए थे और उन्होंने हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया। बंदी की मौत का मामला शासन तक पहुंचा तो डीआईजी जेल बृहस्पतिवार को मुरादाबाद पहुंच गए। उन्होंने जेल में बैरक, जेल अस्पताल में निरीक्षण किया। करीब पांच घंटे तक वह जेल में मौजूद रहे और जांच पड़ताल की। डीआईजी पूरे मामले की जांच कर जा चुकी हैं। माना जा रहा है कि अन्य कर्मचारी और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
बंदी आसे उर्फ आशाराम के खिलाफ बिलारी थाने में 26 अक्तूबर 2024 को एक ग्रामीण ने केस दर्ज कराया था। आरोप है कि आरोपी उसकी दोनों नाबालिग पोतियों का अपहरण कर बाइक पर बैठाकर जंगल में ले गया। आरोपी ने बड़ी बहन के साथ दुष्कर्म किया है। घटना के अगले ही दिन 27 अक्तूबर 2024 को बिलारी पुलिस ने उसे स्योंडारा अला रामपुर संपर्क मार्ग पर मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। मुठभेड़ के दौरान आसे के दाहिने पैर में पुलिस की गोली भी लगी थी। इस मामले में बिलारी के तत्कालीन थाना प्रभारी ने लखपत सिंह ने आसे उर्फ आशाराम पर पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
बंदी आसे उर्फ आशाराम की पत्नी का आरोप है कि जेल में उसके पति की हत्या की गई है। उन्हें कई दिन से जेल में परेशान किया जा रहा था। इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। पोस्टमार्टम होने के बाद बृहस्पतिवार को परिजन अपने घर पर ले आए और देर शाम अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पत्नी कंचन ने बताया कि मेरी दो बेटी पिंकी (5) रिंकी (4) हैं जबकि एक बेटा चिराग (2) है। मेरे पति के गले में काला निशान था। उन्होंने आत्महत्या नहीं की है उनकी हत्या की गई है।
जिला जेल में क्षमता से पांच गुना बंदी और कैदी बंद हैं जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी 60 बंदी रक्षकों पर है। इनमें से कई बंदी बीमार हो जाए तो दो बंदी रक्षकों की ड्यूटी अस्पताल में लगानी पड़ती है। पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह का कहना है कि कुछ बंदी रक्षक छुट्टी पर चले जाते हैं तो बंदी रक्षकों की संख्या और कम रह जाती है।
पिछले साल दिसंबर माह में संभल बवाल के आरोपियों से सपाइयों ने मुलाकात की थी। सपाइयों ने जेल से बाहर आकर बयान दिया तो वह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था जिसके बाद शासन तक हड़कंप मच गया था। इस मामले में डीजी जेल के निर्देश पर डीआईजी जेल कुंतल किशोर ने जेल पहुंचकर पूरे मामले की जांच की थी। जांच में पाया गया था कि मुलाकात कराने में जेल नियमों का पालन नहीं किया गया है। जांच में वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीपी सिंह, जेलर विक्रम सिंह यादव और डिप्टी जेलर प्रवीण सिंह की लापरवाही सामने आई थी। इसके आधार पर जेलर और डिप्टी जेलर को निलंबित कर दिया गया था जबकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीपी सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। बाद में उन्हें भी निलंबित कर दिया गया था।











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